राजस्थान

डॉक्टर गुप्ता बोले- मेरे साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है, इसलिए वीआरएस ले रहा हूं; अब अपना इंस्टीट्यूट खेलूंगा

जयपुर10 मिनट पहले

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जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अशोक गुप्ता ने वीआरएस लेने का निर्णय किया है।

  • 4 सितंबर को पद से हटाने पर हाईकोर्ट पहुंचे थे गुप्ता

राजधानी जयपुर में बच्चों के सबसे बड़े जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अशोक गुप्ता ने वीआरएस लेने का निर्णय किया है। डॉ गुप्ता ने यह फैसला बुधवार को हाईकोर्ट में लगी उनकी याचिका खारिज होने के बाद लिया।वीआरएस क्यों ले रहे है, इस प्रश्न पर डॉ. गुप्ता ने बताया कि सरकार ने डॉक्टर्स की 62 साल बाद एडमिनिस्ट्रेशन वर्क करने की जो नीति बनाई है उसको लेकर ऐसा महसूस होता है कि यहां अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम चलते है। जिस तरह 62 साल की आयु के बाद के लोगों को कंटीन्यू किया गया है और मुझे सिंगल आउट कर दिया उससे मुझे ऐसा महसूस होता है कि शायद मेरे साथ सौतेला व्यवहार हुआ है।

दुर्लभ बीमारी से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए खोलूंगा इंस्टीट्यूट
डॉ. गुप्ता ने बताया कि वे वीआरएस लेने के बाद स्वयं का एक इंस्टीट्यूट तैयार करेंगे, जिसमें दुर्लभ बीमारियों के इलाज पर रिसर्च और इन बीमारियों से ग्रसित बच्चों का इलाज चैरिटी के जरिए करवाएंगे। उन्होंने बताया कि जल्द ही केन्द्र सरकार दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी एक नेशनल पॉलिसी भी ला रही है। मेरा ड्रीम है कि मैं इस पॉलिसी को मूर्तरूप दूं।

4 सितम्बर को हटाया था पद से
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 4 सितम्बर 2020 को एक आदेश जारी कर डॉ गुप्ता को अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाकर उनकी जगह डॉक्टर अरविंद शुक्ला को जिम्मेदारी दी थी। सरकार के इसी आदेश को डॉक्टर गुप्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 10 सितम्बर को सरकार के इन आदेशों पर स्टे लगा दिया था। लेकिन 21 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डॉक्टर गुप्ता की याचिका रद्द कर दी थी।

ये आदेश विवाद की जड़
सूत्रों की मानें तो अधीक्षक पद को लेकर उपजे इस विवाद की मुख्य जड़ चिकित्सा विभाग से जारी 26 जून का यह आदेश है। इसमें कोरोना का हवाला देते हुए सरकार ने प्रशासनिक पदों पर कार्यरत चिकित्सक शिक्षकों का कार्यकाल एक साल बढ़ाकर 62 से 63 वर्ष के लिए कर दिया था। जबकि इस आदेश से पहले नियम था कि चिकित्सक शिक्षक केवल 62 वर्ष की आयु तक ही प्रशासनिक पद पर रह सकते थे।

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