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सावरकर की माफी पर शोर, नेहरू गाँधी की माफी पर चुप्पी क्यों?

Vinayak Damodar Savarkar

लेफ्ट लिबरल गैंग क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के माफीनामे पर शोर मचाता है वह जवाहरलाल नेहरू, राहुल गाँधी के माफीनामे पर एक दम चुप्पी साध लेता है.

अब सवाल ये है कि सावरकर जैसे महान क्रांतिकारी को कायर और अंग्रेजों के आगे घुटने टेकने वाला साबित करने की साजिश क्यों रची गई?

ये थी अंग्रेजों की साजिश
दरअसल काले पानी की सजा काट रहे सावरकर को इस बात का अंदाजा हो गया था कि सेल्युलर जेल की चारदीवारी में 50 साल की लंबी जिंदगी काटने से पहले की उनकी मौत हो जाएगी.

ऐसे में देश को आजाद कराने का उनका सपना जेल में ही दम तोड़ देगा. लिहाजा एक रणनीति के तहत उन्होंने अंग्रेजों से रिहाई के लिए माफीनामा लिखा.

बहुत से लोगों ने मांगी माफी

इसी माफीनामे को आधार बनाकर सावरकर को कायर साबित करने की दम भर कोशिश वामपंथियों ने की पर लेफ्ट लिबरल गैंग के दोमुंहेपन को उजागर करना जरूरी है.

क्योंकि सावरकर के अलावा बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों ने ये काम किया था लेकिन चूंकि वैसे सेनानी इनकी विचारधारा के लिए मुफीद हैं लिहाजा वे उनपर आपराधिक चुप्पी साधे रहते हैं.

जब नेहरू ने माफ करवा ली सजा

Nehru Nabha Riyasat

आप के लिए ये जानना जरूरी है कि साल 1923 में नाभा रियासत में गैर कानूनी ढंग से प्रवेश करने पर औपनिवेशिक शासन ने जवाहरलाल नेहरू को 2 साल की सजा सुनाई गई थी. तब नेहरू ने भी कभी भी नाभा रियासत में प्रवेश न करने का माफीनामा देकर दो हफ्ते में ही अपनी सजा माफ करवा ली और रिहा भी हो गए.

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इतना ही नहीं जवाहर लाल के पिता मोती लाल नेहरू उन्हें रिहा कराने के लिए तत्कालीन वायसराय के पास सिफारिश लेकर भी पहुंच गए थे. पर नेहरू का ये माफीनामा वामपंथी गैंग की नजर में बॉन्ड था और सावरकर का माफीनामा कायरता थी.

ड्रग्स के साथ गिरफ्तार हुए राहुल

rahul gandhi drug

यह खबर आपने सोशल मिडिया के माध्यम से तो सुनी ही होगी अमेरिका में राहुल गाँधी डेढ़ लाख डॉलर और ड्रग्स के साथ पकडे गए थे, अमरीकी कानून के मुताबिक उन्हें 128 साल की जेल की सजा होनी थी, तब सोनिया गाँधी ने बाजपेयी जी के सामने गिड़गिड़ा कर उनकी सजा माफ़ कराया था.

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हालाँकि हम इस खबर की पुष्टि नहीं करते, इसके बारे में आप और अधिक गूगल की सहायता से सर्च कर सकते है.

पर ऐसा ही आरोप उन पर बहुत बार लगा है, सुकन्या राहुल गूगल पर सर्च करने पर आपको उनसे जुडी और भी खबर मिलेगी। जिस बारे में कभी कोई मीडिया, वामपंथी बात नहीं करता है. पर यह सच भी आपको जानना जरुरी है.

तो कौन है असली माफीवीर?

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अंग्रेजो से जेल में प्रताड़ना झेलता हुवा क्रांतिवीर?

या जनता के टैक्स के पैसो से ऐशो आराम की जिंदगी बिता कर महलो में रहने वाले नेहरू गाँधी??

हिन्दुस्तान के इतिहास लेखन की ये बहुत बड़ी विंडबना है कि जिन क्रांतिकारियों ने सेल्युलर और मांडला जेल में यातनाएं झेली उनपर गुमनामी की चादर डाल दी गई जबकि जो क्रांतिकारी सारी सुख सुविधाओं के बीच देहरादून की जेल में जाते थे वो आजादी के मसीहा करार दिए गए.

जरुरत है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक साझा करने की, ताकि जब कोई वामपंथी अगली बार क्रन्तिकारी वीर को माफिजीवी कहे तो उससे सवाल पूछ सके, आखिर कौन है असली माफीवीर?

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