share market in hindi

शेयर बाजार (Stock Market) क्या है?

शेयर बाजार (Stock Market) एक ऐसी जगह हैं जहाँ पर देश की कम्पनिया अपनी हिस्सेदारी को बेच सकती है और लोग उनकी हिस्सेदारी खरीद सकते है। कम्पनिया ऐसा इसलिए करती हैं जिससे की वो अपने कारोबार का विस्तार कर सके और लोग उनकी लोग उनकी हिस्सेदारी इसलिए खरीदते हैं जिससे उनको कंपनी के लाभ मैं हिस्सा मिल सके जितना कंपनी को फायदा होगा उतना ही कंपनी के शेयर खरीदने वालो को लाभ होगा !

शेयर की खरीद बिक्री के लिए पहले कंपनी को सेबी से परमिशन लेकिन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड करना पड़ता हैं जिसे की आईपीओ कहते हैं जिसके तहत कंपनी को सेबी की सभी शर्ते माननी पड़ती हैं जैसे की कंपनी को अपनी सभी वित्तीय जानकारी सेबी या स्टॉक एक्सचेंज को बतानी पड़ती हैं इसके तहत कंपनी को अपने तिमाही नतीजे भी एक्सचेंज को बताने पड़ते हैं या सार्वजानिक करने पड़ते हैं ! उसके बाद कंपनी स्टॉक एक्सचेंज मैं लिस्टेड हो जाती हैं लेकिन फिर भी आम आदमी डायरेक्ट स्टॉक एक्सचेंज से स्टॉक खरीद नहीं सकता उसके लिए उसे स्टॉक ब्रोकर की मदद लेनी पड़ती हैं क्योकि स्टॉक ब्रोकर ही उसे एक शेयर खरीदने मैं उसकी मदद करेगा और उसे एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्द कराएगा जिससे आप ऑनलाइन ही शेयर की खरीद बिक्री कर सकते हैं लेकिन स्टॉक ब्रोकर इसके लिए एक चार्ज लेता हैं और इसके अतिरिक्त भारत सरकार भी अपना टैक्स लेती हैं! सभी स्टॉक ब्रोकर का कमीशन का कमीशन अलग अलग हो सकता हैं लेकिन भारत सरकार का टैक्स सभी ब्रोकर पर बराबर होता हैं ! भारत मैं बहुत से स्टॉक ब्रोकर हैं जैसे की शेरखान ब्रोकर लिमिटेड, अंजल ब्रोकर लिमिटेड, ज़ेरोढा, उप स्टॉक्स लिमिटेड इत्यादि जिसमे की उप स्टॉक्स लिमिटेड बहुत ही काम चार्ज में अकाउंट खोलता हैं और बहुत काम चार्ज लेता हैं!

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भारत में दो बड़े स्टॉक एक्सचेंज हैं जो की बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ! आप कही से भी शेयर की खरीद बिक्री कर सकते हैं बशर्ते की कंपनी उस एक्सचेंज में लिस्टेड होनी चाहिए और आपका स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से उसे एक्सचेंज में खाता होना चाहिए !

कैसे होती है सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव की गणना ?

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में उठा पटक होती रहती हैं । वर्ष 2008-09 मे 21,000 अंक से ऊपर के रिकार्ड स्तर पर पहुंचने के बाद शेयर बाजार 7,500 अंक तक लुढ़क गया था और इससे निवेशकों में हड़कंप मच गया था । लकिन आज फिर शेयर बाजार 39000 के स्तर को छू चूका हैं ! हम अक्सर शेयर बाजार में अंकों के चढ़ने और उतरने की चर्चा करते हैं, जैसे शेयर बाजार 300 या 400 अंक ऊपर या नीचे गिर गया। पर क्या हम यह जानते हैं कि शेयर बाजार के ऊपर उठने या फिर नीचे गिरने की गणना कैसे की जाती है।

देश में मुख्य रूप से दो शेयर बाजार (Stock Market)  हैं: मुंबई स्थित बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन को सेंसेक्स से बताया जाता है जबकि एनएसई में इसे निफ्टी के नाम से जाना जाता है।

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अगर हम कहते हैं कि सेंसेक्स ऊपर गया तो इसका मतलब होता है कि बीएसई में शामिल अधिकांश कंपनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं ठीक इसी तरह सेंसेक्स के नीचे लुढ़कने का मतलब होता है, इसमें शामिल कंपनियों के शेयरों के भाव नीचे गिरना।

सेंसेक्स का आकलन

बीएसई में सूचीबद्ध 30 कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर सेंसेक्स का निर्धारण किया जाता है। इसके आकलन के लिए मुक्त बाजार पूंजीकरण विधि का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यहां ध्यान रखना चाहिए कि सेंसेक्स के आकलन को सटीक बनाने के लिए समय समय पर इन 30 कंपनियों में बदलाव किया जाता है। वर्तमान में सेंसेक्स की सूचीबद्ध 30 कंपनियों की सूचि इस प्रकार हैं

1 Asian Paints
2 Axis Bank
3 Bajaj Auto
4 Bajaj Finance
5 Bharti Airtel
6 Coal India
7 HDFC Bank
8 HCL Technologies
9 Hero MotoCorp
10 Hindustan Unilever
11 Housing Development Finance Corporation
12 ICICI Bank
13 IndusInd Bank
14 Infosys
15 ITC
16 Kotak Mahindra Bank
17 Larsen & Toubro
18 Mahindra & Mahindra
19 Maruti Suzuki
20 NTPC
21 Oil and Natural Gas Corporation
22 Power Grid Corporation of India
23 Reliance Industries
24 State Bank of India
25 Sun Pharmaceutical
26 Tata Consultancy Services
27 टाटा Motors
28 यस बैंक
29 Tata Steel
30 Vedanta

निफ़्टी का आकलन

निफ़्टी में सूचीबद्ध 50 कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन के आधार पर निफ़्टी का निर्धारण किया जाता है। इसके आकलन के लिए मुक्त बाजार पूंजीकरण विधि का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यहां ध्यान रखना चाहिए कि निफ़्टी के आकलन को सटीक बनाने के लिए समय समय पर इन 50 कंपनियों में बदलाव किया जाता है। अब इस तकनीक को जानने के पहले यह समझते हैं कि बाजार पूंजीकरण क्या है? इसके अतिरिक्त निफ़्टी की सूचीबद्ध 50 कंपनियों की लिस्ट इस प्रकार हैं

1 Adani Ports & SEZ Limited
2 Asian Paints Ltd
3 Axis Bank
4 Bajaj Auto
5 Bajaj Finance
6 Bajaj Finserv
7 Bharti Airtel
8 Bharti Infratel Ltd.
9 BPCL
10 Cipla
11 Coal India
12 Dr. Reddy’s Laboratories
13 Eicher Motors
14 GAIL
15 Grasim Industries
16 HCL Technologies
17 HDFC
18 HDFC Bank
19 Hero MotoCorp
20 Hindalco Industries
21 Hindustan Unilever
22 Britannia Industries
23 ICICI Bank
24 Indiabulls Housing Finance
25 IndusInd Bank
26 Infosys
27 IOC
28 ITC Limited
29 JSW Steel
30 Kotak Mahindra Bank
31 Larsen & Toubro
32 Mahindra & Mahindra
33 Maruti Suzuki
34 NTPC Limited
35 ONGC
36 PowerGrid Corporation of India
37 Reliance Industries
38 State Bank of India
39 Sun Pharmaceutical
40 Tata Consultancy Services
41 Tata Motors
42 Tata Steel
43 Tech Mahindra
44 Titan Company
45 UltraTech सीमेंट
46 United Phosphorus Limited
47 Vedanta
48 Wipro
49 Yes Bank
50 Zee Entertainment Enterprises

बाजार पूंजीकरण

शेयर के आधार पर किसी कंपनी का कुल मूल्य ही उस कंपनी का बाजार पूंजीकरण कहलाता है। किसी कंपनी का बाजार पूंजीकरण पता करने के लिए उस कंपनी के जारी किए गए कुल शेयरों की संख्या को कंपनी के एक शेयर के भाव से गुना कर दिया जाता है। कंपनी के बाजार पूंजीकरण के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि कंपनी मिड-कैप, स्मॉल-कैप या फिर लार्ज-कैप है। बाजार पूंजीकरण को समझने के बाद हम मुक्त बाजार पूंजीकरण को समझने की कोशिश करेंगे।

मुक्त बाजार पूंजीकरण

किसी कंपनी के शेयर विभिन्न किस्म के निवेशकों के पास होते हैं। इनमें से कुछ शेयरों पर सरकार का कब्जा हो सकता है तो कुछ पर कंपनी के संस्थापक या फिर निदेशकों का। अब मुक्त या फ्री फ्लोट शेयर उन्हें कहते हैं जिनका कारोबार खुले बाजार में किया जाता है। यानी जिन्हें कोई भी निवेशक खरीद सकता है।

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जब हम सेंसेक्स का आकलन करते हैं तो हम दरअसल इन्हीं शेयरों की चर्चा कर रहे होते हैं। मुक्त शेयर ऐसे शेयर होते हैं जिन पर कंपनी के संस्थापक, निदेशक या मालिक का कोई हक नहीं होता, जिनपर किसी व्यक्ति या इकाई की होल्डिंग्स का हक नहीं होता। जिनपर सरकार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), निजी कारोबारी इकाइयों, एसोशिएट या समूह कंपनियों कर्मचारी वेलफेयर ट्रस्ट का हिस्सा न हो।

साथ ही ऐसे शेयर जो लॉक्ड इन की श्रेणी में आते हैं और जिन्हें आम निवेशकों के लिए जारी नहीं किया जाता है, वे भी मुक्त शेयर नहीं कहलाते। हर कंपनी को बीएसई को संपूर्ण रिपोर्ट सौंपनी होती है कि उसके कितने शेयर किन किन लोगों के पास हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर बीएसई तय करती है कि कंपनी के मुक्त शेयर कितने हैं और कंपनी का मुक्त बाजार पूंजीकरण कितना है।

पूंजी बाजार का क्या कार्य है?

पूंजी बाजार अर्थव्यवस्था में पूंजी निर्माण को बढ़ाता है और इसमें शामिल हैं –

प्राथमिक बाजार एक ऐसा स्थान है जहां कंपनियों के नए प्रस्तावों को एक आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आईपीओ) या अधिकार जारी करने के रूप में क्रियान्वित किया जाता है।

द्वितीयक बाजार एक ऐसा बाजार है जहां प्रतिभूतियों को प्राथमिक बाजार में जनता के लिए पेश किए जाने के बाद ट्रेड किया जाता है और/या स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होता है। अधिकांश ट्रेडिंग इसी बाजार में की जाती है जिसमें इक्विटी बाजार और ऋण बाजार शामिल हैं।

इक्विटी शेयर क्या है?

एक इक्विटी शेयर स्वामित्व के प्रारूप को प्रदर्शित करता है। ऐसे एक शेयर का धारक कंपनी का एक सदस्य होता है और उसके पास मतदान का अधिकार होता है। वह अपने मतदान से कंपनी को निर्णय लेने में मदद करता हैं ऐसे सभी कंपनी के शेयर धारक कंपनी के कारोबार में डिऐक्ट या इनडायरेक्ट रूप से शामिल होते हैं कंपनी को जब भी बड़े फैसले लेने होते हैं कंपनी अपने सभी शेयर धारक को मेल या पत्र लिख कर अवगत कराती है तथा अपने शेयर धारक को अपने उस फैसले पर वोट करने के लिए कहती हैं जिससे वो सही निर्णय ले सके !

शेयर बाजार में जोखिम क्या हैं ?

आम जिंदगी में एक कहावत है जितना जितना ज्यादा जोखिम उतना ज्यादा लाभ वो कहावत शेयर बाजार में एक दम ठीक बैठती हैं क्योकि इक्विटी शेयर “उच्च जोखिम, उच्च रिटर्न निवेश” होते हैं। इक्विटी निवेश और सभी अन्य निवेश विकल्पों में प्रमुख अंतर यह है कि जहां अन्य विकल्पों जैसे बैंक जमा, लघु बचत योजनाओं, डिबेंचर, बांड आदि से मिलने वाला लाभ निर्धारित और निश्चित होता है, वहीं इक्विटी निवेशों से होने वाली कमाई बेहद अनिश्चित और विविध होती है। सही समय पर ली गई एक अच्छी स्क्रिप काफी अच्छा रिटर्न दिला सकती है, अन्यथा रिटर्न बेहद कम भी हो सकता है या यह ऋणात्मक भी हो सकता है, यानी शेयर बाजार (Stock Market) में किया गया निवेश किया गए रुपये स्वयं भी धीरे धीरे ख़त्म हो सकते है। संक्षेप में, यदि स्थिर आय श्रेणी साधनों में निवेश काफी हद तक सुरक्षित और जोखिम मुक्त होता है, तो इक्विटी और संबंधित क्षेत्रों में निवेश जोखिम भरा माना जा सकता है।

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लेकिन शेयर मार्किट में लम्बे समय में नुकसान होने की सम्भावना काफी हद तक काम हो जाती हैं और यह बात मैं ही नहीं कहे रहा बल्कि शेयर मार्किट के भगवान कहे जाने वाले वारेन बफ़ेट जी ने भी कही हैं की लम्बे समय में शेयर बाजार (Stock Market) में नुकसान होना असंभव हैं ! अगर हम पिछले ४० से ५० सालो को देखे तो शेयर मार्किट ने १४% से १५% तक कम्पाउंडिंग रिटर्न दिया हैं जो की किसी और एसेट ने नहीं दिया !

लाभांश क्या होता है?

लाभांश का सीधा सा मतलब कंपनी के लाभ से हैं यानि की कंपनी ने कितनी कमाई की हैं! शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्टेड हर कंपनी को अपने तिमाही नतीजे स्टॉक एक्सचेंज को देने पड़ते हैं जिसमे कंपनी अपने लाभ या नुकसान या कंपनी ने कितना सेल किया उसकी जानकारी साझा करनी पड़ती हैं ! उसके बाद कंपनी वार्षिक आधार पर जितना की कंपनी को लाभ हुआ हैं उसके आधार पर कंपनी के शेयर होल्डर को कंपनी के लाभ का कुछ हिस्सा देती हैं तथा कुछ हिस्सा कंपनी अपने कारोबार के विस्तार में लगाती हैं! कंपनी अपने लाभ का कितना हिस्सा शेयर होल्डर में बटेगी तथा कितना हिस्सा अन्य जगह इन्वेस्ट करेगी यह कंपनी के बोर्ड ऑफ़ मेंबर्स तय करते हैं लकिन कंपनी जब भी लाभांश का हिस्सा साझा करती हैं तो अपने प्रत्येक शेयर धारक को उनके शेयर के संख्या के आधार पर ही बांटती हैं !

बोनस शेयर क्या होता है?

जैसा की हमने पहल ही बताया था की कम्पनिया स्टॉक एक्सचेंज को अपने तिमाही नतीजे बताती हैं की उसमे उसकी सेल कितनी थी और उसको प्रॉफिट हुआ या लॉस इसके अतिरिक्त भी कई जानकारी देनी पड़ती हैं जिनका जिक्र हम अपने अगली किसी पोस्ट में करेंगे ! इन्ही तिमाही नतीजों के आधार पर कंपनी सालाना नतीजे घोषित करती हैं और कंपनी अपने लाभांश का कुछ हिस्सा न देकर कंपनी अपने शेयर धारक को कुछ अतिरिक्त शेयर बिना कोई मूल्य लिए दे देती हैं जिन्हे की बोनस शेयर कहते हैं !

म्यूचुअल फण्ड क्या होते हैं ?

म्यूच्यूअल फंड (Mutual fund) यह एक प्रकार का सामुहिक निवेश होता है। इसमे निवेशको का समुह मिल कर शेयर बाजार, अल्प अविधि के निवेश या अन्य प्रतिभूतियों (सेक्यूरीटीज) मे निवेश करते है। । म्यूच्यूअल फंड मे एक फंड प्रबंधक होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है, और लाभ और हानि का हिसाब रखता है। इस प्रकार हुए फायदे-नुकसान को निवेशको मे बाँट दिया जाता है। स्टॉक बाजार की पर्याप्त जानकारी न होने पर भी निवेश की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुलभ मार्ग म्यूचुअल फंड होता है। म्यूचुअल फंड संचालक (कंपनी) सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है, और उनसे कुछ सुविधा शुल्क भी लेती है। फिर इस राशि को उनके लिए बाजार में निवेश करती है। इनमें में निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक को इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह चिंता फंड मैनेजर की होती है। वही निवेशक के निवेश का रखरखाव करने वाला होता है।

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