Happy Friendship Day Krishna Sudama Day

Happy Friendship Day: बारिश और इस मौसम को सुहाना बनाने वाला तेज हवा ऐसा ही कुछ रिश्ता होता है मित्रता का। खून के रिश्ते से हमें परिवार मिलते हैं, लेकिन दोस्ती भगवान का दिया हुआ वह खूबसूरत तोहफा है जो सभी रिश्तों की बुनियाद बन जाता है। दोस्त उसी को कहा जाता है जो आपकी जरूरत के समय आपके साथ खड़ा हो। जिसके साथ होने पर आप दुनिया के सारे दुःख दर्द भूल कर कुछ देर खुद को अलग दुनिया में महसूस कर सकते है।

भगवान कृष्ण ने भी की थी सुदामा से दोस्ती

krishna sudama

Image: Happy Friendship Day Krishna and Sudama

कृष्ण-सुदामा (krishna sudama) की मित्रता बहुत प्रचलित है। सुदामा (Sudama) बहुत गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास धन नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा, हम भले ही भूखे रहें, लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए न ? इतना बोलते-बोलते उसकी आंखों में आंसू आ गए। सुदामा को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा, क्या कर सकते हैं ? किसी के पास मांगने थोड़े ही जा सकते है।

पत्नी ने सुदामा (Sudama) से कहा, आप कई बार कृष्ण (Krishna) की बात करते हैं। आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हैं। वे तो द्वारका के राजा हैं। एक बार वहां क्यों नहीं जाते है? और कहा कि आप वहां जाइए तो आपको कुछ मांगना नहीं पड़ेगा।

द्वारका देखकर सुदामा दंग रह गए। पूरी नगरी सोने की थी। लोग बहुत सुखी थे। सुदामा पूछते-पूछते कृष्ण के महल तक पहुंचे। द्वारपाल ने भिक्षुक जैसे लगने वाले सुदामा से पूछा, यहां क्या काम है ?

Also Read:

सुदामा ने जवाब दिया, मुझे कृष्ण से मिलना है। वह मेरा मित्र है। अंदर जाकर कहिए कि सुदामा आपसे मिलने आया है।

द्वारपाfriendship day images for whatsappल को सुदामा (Sudama) के वस्त्र देखकर हंसी आई। उसने जाकर कृष्ण को बताया। सुदामा का नाम सुनते ही कृष्ण खड़े हो गए ! और सुदामा से मिलने जैसे थे वैसे ही खाली पैर दौड़ पड़े। सभी आश्चर्य से देख रहे थे ! कहां राजा और कहां ये भिक्षुक?

द्वार पर द्वारपालों द्वारा लगातार सुदामा का उपहास उड़ाया गया, सुदामा के आने की खबर कृष्ण तक पहुंचाने में द्वारपाल द्वारा लम्बा समय लिया गया, तब सुदामा को भी लगा की कृष्ण राजा है, कही उन्हें अपमानित महसूस ना हो, ये सोचकर सुदामा लौटने लगे, इधर श्री कृष्ण जब द्वार पर पहुंचे तो उन्हें सुदामा दिखाई ना दिए, उन्होंने पूछा सुदामा कहा गए, वे सुदामा के लौटने की पथ पर नंगे पाँव ही सुधबुध खोकर दौड़ पड़े, पूरा नगर आश्चर्य चकित था, कि एक भिक्षुक के लिए द्वारिकाधीश स्वयं कैसे दौड़ लगा रहे है? वे चाहते तो अपने सैनिको को उन्हें वापस लाने का आदेश भी दे सकते थे

Also Read:

कृष्णा सुदामा का जब मिलन हुवा, कृष्ण जी ने सुदामा को ह्रदय से लगा लिया, दोनों ओर आसुओ की धारा फुट पड़ी, एक राजा और एक गरीब ब्राम्हण के मिलन का ये दृश्य बहुत ही अद्भुत था, भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा को ले जाकर उन्हें अपने पलंग पर बिठाया। उनके पांवों को धोकर चरणामृत लिया तथा उनको स्नान करवाकर रेशमी वस्त्र पहनने के लिए दिया। रुक्मिणी जी स्वयं उन्हें पंखा झलने लगीं। जब कृष्ण ने सुदामा से कहा, सखा मेरे लिए क्या लाये हो, तो सुदामा साथ लाये पोहे की पोटली छुपाने लगे, लेकिन कृष्ण ने खिंच ली। कृष्ण ने उसमें से पोहे निकाले और खाते हुए बोले, ऐसा अमृत जैसा स्वाद मुझे और किसी में नहीं मिला।

how to make friendship day card

बाद में दोनों खाना खाने बैठे। सोने की थाली में अच्छा भोजन परोसा गया। सुदामा का दिल भर आया। उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है। सुदामा वहां दो दिन रहे। वे कृष्ण के संकोच वश कुछ मांग नहीं सके। तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले। कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने गए।

घर जाते हुए सुदामा को विचार आया, घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए? तो क्या जवाब दूंगा?

sudama krishna image

सुदामा घर पहुंचे। वहां उन्हें अपनी झोपड़ी नजर ही नहीं आई ! उतने में ही एक सुंदर घर में से उनकी पत्नी बाहर आई। उसने सुंदर कपड़े पहने थे। पत्नी ने सुदामा से कहा, देखा कृष्ण का प्रताप ! हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुःख दूर कर दिए। सुदामा आश्चर्य चकित थे, सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। भगवान ने उन तीन मुट्ठी पोहे के बदले सुदामा को तीनों लोकों की सम्पत्ति दे डाली।

सच्चा मित्र प्रेम, विश्वास, और सुख दुख में एकदूसरे का बराबर का साथ होता है। दोस्ती में ऊंच-नीच नहीं देखी जाती और न ही अमीरी-गरीबी । इसीलिए आज इतने युगों के बाद भी दुनिया कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्चे मित्र प्रेम के प्रतीक के रूप में याद करती है।

इस दिन मित्र एक दूसरे को गिफ्टस, कार्ड देते है। एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते है। मित्रो के साथ पूरा दिन बीताकर अपनी मित्रता को आगे तक ले जाने व किसी भी मुसीबत में एक दूसरे का साथ देने का वादा करते हैं। हालांकि जिनके पास गिफ्टस व कार्ड देने की क्षमता नहीं है, वह अपने प्यार के एहसास से ही दोस्त को दोस्ती का महत्व समझा देते हैं। पहले इस दिन को कुछ चुनिंदा देशों में कुछ चुनिंदा लोगों में ही मनाने का दस्तूर था लेकिन इन दिनों सोशल नेटवर्किग साइट्स की बढ़ते पायदान की वजह से लोगों में यह दिन (Happy Friendship Day) काफी चर्चित हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *