kanaklata barua

केवल 17 वर्षीय कनकलता बरुआ (Kanaklata Barua) अन्य बलिदानी वीरांगनाओं से आयु में छोटी भले ही रही हों, लेकिन त्याग व बलिदान में उनका कद किसी से कम नहीं।

कनकलता बरुआ (Kanaklata Barua) का जन्म 22 दिसंबर, 1924 को असम के बांरगबाड़ी गांव में कृष्णकांत बरुआ के घर में हुआ था। कनकलता बचपन में ही अनाथ हो गई थी। कनकलता का झुकाव राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन की ओर होता गया। जब मई 1931 ई. में गमेरी गांव में रैयत सभा आयोजित की गई, उस समय कनकलता केवल सात वर्ष की थी। फिर भी सभा में अपने मामा देवेन्द्र नाथ और यदुराम बोस के साथ उसने भी भाग लिया। सभा के अध्यक्ष प्रसिद्ध नेता ज्योति प्रसाद अगरवाला थे। अगरवाला के गीतों से कनकलता भी प्रभावित और प्रेरित हुई। इन गीतों के माध्यम से कनकलता के बाल–मन पर राष्ट्र–भक्ति का बीज अंकुरित हुआ। स्वतंत्रता संग्राम में शामिल सन् 1931 के रैयत अधिवेशन में भाग लेने वालों को राष्ट्रद्रोह के आरोप में बंदी बना लिया गया।

इसी घटना के कारण असम में क्रांति की आग चारों ओर फैल गई। मुम्बई के कांग्रेस अधिवेशन में 8 अगस्त, 1942 को ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित हुआ। यह ब्रिटिश के विरुद्ध देश के कोने-कोने में फैल गया। असम के शीर्ष नेता मुंबई से लौटते ही पकड़कर जेल में डाल दिये गये। अंत में ज्योति प्रसाद आगरवाला को नेतृत्व संभालना पड़ा। उनके नेतृत्व में गुप्त सभा की गई।

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पुलिस के अत्याचार बढ़ गए और स्वतंत्रता सेनानियों से जेलें भर गई। शासन के दमन चक्र के साथ आंदोलन भी बढ़ता गया। थाने पर तिरंगा फहराने का निर्णय एक गुप्त सभा में 20 सितंबर, 1942 ई. को तेजपुर की कचहरी पर तिरंगा झंडा फहराने का निर्णय लिया गया। 20 सितंबर, 1942 के दिन तेजपुर से 82 मील दूर गहपुर थाने पर तिरंगा फहराया जाना था। दोनों हाथों में तिरंगा झंडा थामे कनकलता बरुआ उस जुलूस का नेतृत्व कर रही थीं।

जुलूस के नेताओं को संदेह हुआ कि कनकलता बरुआ (Kanaklata Barua) और उसके साथी कहीं भाग न जाएं। संदेह को भांप कर कनकलता शेरनी के समान गरज उठी- “हम युवतियों को अबला समझने की भूल मत कीजिए। आत्मा अमर है, नाशवान है तो मात्र शरीर। अतः हम किसी से क्यों डरें?” ‘करेंगे या मरेंगे’ ‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’, जैसे नारों से आकाश को चीरती हुई थाने की ओर बढ़ चलीं।

kanaklata barua freedom fighter

जुलूस के गगनभेदी नारों से आकाश गूंजने लगा आत्म बलिदानी जत्था थाने के करीब जा पहुंचा। पीछे से जुलूस के गगनभेदी नारों से आकाश गूंजने लगा। उस जत्थे के सदस्यों में थाने पर झंडा फहराने की होड़-सी मच गई। हर एक व्यक्ति सबसे पहले झंडा फहराने को बेचैन था। थाने का प्रभारी पी. एम. सोम जुलूस को रोकने के लिए सामने आ खड़ा हुआ। कनकलता बरुआ (Kanaklata Barua) ने उससे कहा- “हमारा रास्ता मत रोकिए। हम आपसे संघर्ष करने नहीं आए हैं। हम तो थाने पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता की ज्योति जलाने आए हैं। उसके बाद हम लौट जायेंगे।”

थाने के प्रभारी ने कनकलता बरुआ से कहा कि यदि तुम लोग एक इंच भी आगे बढ़े तो गोलियों से उड़ा दिए जाओगे। इसके बावजूद भी कनकलता बरुआ आगे बढ़ीं और कहा- “हमारी स्वतंत्रता की ज्योति बुझ नहीं सकती। तुम गोलियां चला सकते हो, पर हमें कर्तव्य विमुख नहीं कर सकते।” इतना कह कर वह ज्यों ही आगे बढ़ी, पुलिस ने जुलूस पर गोलियों की बौछार कर दी। पहली गोली कनकलता बरुआ ने अपनी छाती पर झेली। गोली बोगी कछारी नामक सिपाही ने चलाई थी। दूसरी गोली मुकुंद काकोती को लगी, जिससे उसकी तत्काल मृत्यु हो गई। इन दोनों की मृत्यु के बाद भी गोलियां चलती रहीं। किंतु झंडे को न तो झुकने दिया न ही गिरने दिया।

कनकलता गोली लगने पर गिर पड़ी, किंतु उसके हाथों का तिरंगा झुका नहीं। उसका साहस व बलिदान देखकर युवकों का जोश और भी बढ़ गया। कनकलता बरुआ के हाथ से तिरंगा लेकर गोलियों के सामने सीना तानकर वीर बलिदानी युवक आगे बढ़ते गये। एक के बाद एक गिरते गए, किंतु झंडे को न तो झुकने दिया न ही गिरने दिया। उसे एक के बाद दूसरे हाथ में थामते गए और अंत में रामपति राजखोवा ने थाने पर झंडा फहरा दिया गया। शहीद वीरांगना का अंतिम संस्कार शहीद मुकंद काकोती के शव को तेजपुर नगरपालिका के कर्मचारियों ने गुप्त रूप से दाह–संस्कार कर दिया, किंतु कनकलता बरुआ (Kanaklata Barua) का शव स्वतंत्रता सेनानी अपने कंधों पर उठाकर उसके घर तक ले जाने में सफल हो गए। उसका अंतिम संस्कार बांरगबाड़ी में ही किया गया।

आज ऐसी जांबाज कनकलता बरुआ को शत् शत् नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।

One thought on “Kanaklata Barua – आसाम कि 17 साल की इस लड़की के सीने पर पुलिस वालों ने मार दी गोली”
  1. Google Mera Naam Kya Hai ? गूगल से पुछे गूगल मेरा नाम क्या है - says:

    […] दिया है। आज से कुछ समय पहले हमें गूगल पर कुछ भी सर्च करने के लिए टाइप करना पड़ता था। लेकिन अब हम […]

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