सावित्री भाभी

क्‍या आपको पता है कि युद्ध में बहादुरी के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्‍च सम्‍मान ‘परमवीर चक्र‘ (Param Vir Chakra) का डिजाइन एक विदेशी महिला ने तैयार किया था. इस विदेशी महिला का नाम इवा योन्ने लिण्डा था. स्‍विटजरलैंड मूल की इवा ने भारतीय सैन्‍य अधिकारी से प्रेम विवाह किया था. इस विवाह के बाद उन्‍होंने हिंदू धर्म ग्रहण किया और उनका नाम इवा योन्ने लिण्डा से बदलकर सावित्री बाई खानो

लकर (Savitri Khanolkar) रख दिया गया. सावित्री बाई खानोलकर ने परमवीर चक्र के साथ बहादुरी अथवा शांति के लिए दिए जाने वाले अशोक चक्र (Ashoka Chakra), महावीर चक्र (Maha Vir Chakra), कीर्ति चक्र (Kirti Chakra), वीर चक्र (Vir Chakra) और शौर्य चक्र (Shaurya Chakra) को भी डिजाइन किया है. इसके अलावा, सावित्री बाई ने सामान्य सेवा पदक 1947 (General Service Medal 1947) डिजाइन किया था, इस पदक को 1965 तक ही प्रदान किया गया था.

1947 में हुए भारत-पाक युद्ध (Indo-Pakistani War of 1971) में अदम्‍य साहस और अभूतपूर्व युद्ध कौशल दिखाने वाले वीरों को सम्‍मानित करने के लिए भारतीय सेना नए पदक तैयार करने पर काम कर रही थी. पदक तैयार

करने की जिम्‍मेदारी मेजर जनरल हीरा लाल अटल (Hira Lal Atal) को दी गई थी. अब तक मेजर जनरल अटल ने पदकों के नाम पसन्द कर लिये थे. इन पदकों को परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र का नाम दिया गया था. इसी दौरान, मेजर जनरल अटल की मुलाकात सावित्री बाई से हुई.

इस मुलाकात के दौरान सावित्री बाई की भारतीय संस्‍कृति पर समझ, पौराणिक प्रसंग और अध्‍यात्मिक ज्ञान ने मेजर जनरल अटल को खासा प्रभावित किया था. सावित्री बाई की चित्रकला देखने के बाद मेजर जनरल अटल ने मन ही मन ठान लिया था कि वह पदक की डिजाइन सावित्री बाई से ही तैयार कराएंगे. एक दिन मेजर जनरल अटल ने यह प्रस्‍ताव सावित्री बाई के समक्ष रख दिया, जिसे उन्‍होंने सहर्ष स्‍वीकार कर लिया. सावित्री बाई ने कुछ दिनों की मेहनत के बाद सभी पदों का डिजाइन तैयार कर मेजर जनरल अटल को भेज दिया.

Also Read:

परमवीर चक्र का मूल स्‍वरूप के तौर पर 3.5 सेमी व्‍यास वाले कांस्‍य धातु की गोलकार कृति तैयार की गई. जिसमें सावित्री बाई ने भारत की आदिकाल से अब तक की वीरता, त्‍याग और शांति के सूचक को परमवीर चक्र में शामिल किया था. इसमें इंद्र के वज्र को दर्शाकर महर्षि दधीचि के त्‍याग को दर्शाया गया है. परमवीर चक्र में चारों तरफ वज्र के चार चिह्न बनाए गए हैं. पदक के बीच में अशोक की लाट से लिए गए राष्‍ट्र चिह्न चक्र को जगह दी गई है. पदक के दूसरी ओर कमल का चिह्न है, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी में परमवीर चक्र लिखा गया है.

4 thoughts on “परमवीर चक्र से जुड़ा हुवा है सावित्री भाभी का इतिहास, ये है असली कहानी”
  1. नीरा आर्या: भारत की प्रथम महिला जासूस कैप्टन की सम्पूर्ण गाथा - says:

    […] परमवीर चक्र से जुड़ा हुवा है सावित्री भ… […]

  2. भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद टोक्यो में कैसे रचा इतिहास, ये है असली वजह - says:

    […] परमवीर चक्र से जुड़ा हुवा है सावित्री भ… […]

  3. Digital Marketing In Hindi : जानिए यह क्या हैं और इसे कैसे करें - says:

    […] परमवीर चक्र से जुड़ा हुवा है सावित्री भ… […]

  4. Google Mera Naam Kya Hai ? गूगल से पुछे गूगल मेरा नाम क्या है - says:

    […] अनुसार उपयोग कर सकते है। आपकी फैमिली का नंबर जिस नाम से फ़ोन में सेव है, आपको कॉल करने के लिए उस नाम का उपयोग […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version